ऋषिकेश। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति द्वारा आज श्री रमेश चंद्र जुगलान की अध्यक्षता में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें बापूग्राम को शीघ्र राजस्व ग्राम घोषित करने की माँग की गई। ज्ञापन सौंपे जाने के अवसर पर समिति के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में बापूग्राम के निवासी उपस्थित रहे।
**एक ऐतिहासिक परिकल्पना**
समिति ने ज्ञापन में बताया कि बापूग्राम की स्थापना कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह उस कालखंड की उपज है जब भारत स्वतंत्रता के बाद अपने भविष्य की नींव रख रहा था। ऋषिकेश के समीप गंगा तट पर एक विस्तृत भूभाग का चयन किया गया था, जहाँ एक दूरदर्शी योजना के अंतर्गत संगठित ग्राम व्यवस्था स्थापित करने की परिकल्पना की गई थी। समिति के अनुसार उस समय की सोच स्पष्ट थी कि एक ऐसा स्थान बने जहाँ मनुष्य, प्रकृति और पशुधन एक समन्वित जीवन व्यवस्था में सह-अस्तित्व करें, और जहाँ ग्राम जीवन स्वावलंबन, श्रम व सम्मान पर आधारित हो।
**”पशुलोक” नाम के पीछे का दर्शन**
समिति ने बताया कि इस स्थान के लिए प्रस्तावित “पशुलोक” नाम केवल एक नामकरण नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन-दर्शन था, जिसमें भारत के ग्राम को आत्मनिर्भर, संतुलित और स्वाभिमानी बनाने की सोच निहित थी। समिति के अनुसार इस योजना के अंतर्गत केवल संस्थान स्थापित करना उद्देश्य नहीं था, बल्कि इसका मूल केंद्र ग्राम बसाना और समाज बसाना था। भूमि का विन्यास, बसावट की तैयारी और किसानों को वहाँ स्थापित करने की प्रक्रिया उसी दौर में प्रारंभ हो चुकी थी।
**मीरा बहन का योगदान**
बापूग्राम की स्थापना की कहानी मीरा बहन (मूल नाम मेडेलीन स्लेड) के बिना अधूरी है। ब्रिटेन में जन्मीं मेडेलीन स्लेड 1925 में महात्मा गांधी से प्रभावित होकर भारत आईं और उनकी अनुयायी बनकर “मीरा बहन” कहलाईं। वर्ष 1946 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार की मानद विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया, और 1947 में सरकार ने ऋषिकेश के निकट विरभद्र क्षेत्र में लगभग एक हजार हेक्टेयर वन भूमि उन्हें पशुपालन विकास योजनाओं हेतु सौंपी। इसी भूमि पर उन्होंने पशुलोक आश्रम स्थापित किया और साथ ही भूमिहीन तथा निर्धन परिवारों के पुनर्वास हेतु बापूग्राम बस्ती की नींव रखी। गांधी जी की हत्या के बाद फरवरी 1948 में मीरा बहन ने अपने साथी अनुयायियों को पत्र लिखकर बताया था कि वे इस भूमि को आदर्श ग्रामों, स्वावलंबी कृषि और कुटीर उद्योगों के माध्यम से बापू के आदर्शों के प्रतिमान के रूप में विकसित करना चाहती थीं — और “पशुलोक” नाम को स्वयं गांधी जी की स्वीकृति प्राप्त थी। समिति का कहना है कि यह इतिहास इस बात का प्रमाण है कि बापूग्राम केवल एक स्थानीय बसावट नहीं, बल्कि गांधीवादी ग्राम स्वराज की एक जीवंत प्रयोगशाला के रूप में स्थापित किया गया था।
**राष्ट्रनिर्माताओं का आशीर्वाद**
समिति ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि इस पूरी पहल को उस समय के राष्ट्रनिर्माताओं का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त था। महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के विचार इस योजना की आत्मा थे, सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में ऐसी संस्थागत व्यवस्थाएँ संभव हो सकीं, और डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति व आशीर्वाद ने इसे राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। समिति के अनुसार इन विभूतियों के पत्र और विचार आज भी साक्षी हैं कि यह पहल केवल स्थानीय प्रयास नहीं, बल्कि राष्ट्र के विचार और संकल्प का विस्तार थी।
**अधूरी रह गई विरासत**
समिति ने कहा कि समय के साथ परिस्थितियाँ बदलीं और यह महान परिकल्पना अपने पूर्ण स्वरूप तक नहीं पहुँच सकी, हालाँकि उस प्रयास की आत्मा आज भी बापूग्राम के निवासियों के जीवन में जीवित है। समिति के अनुसार इसी अधूरेपन के चलते आज भी निवासी अपने भूमि, आवास और सामाजिक अधिकारों से जुड़ी अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।
**राजस्व ग्राम की स्पष्ट माँग**
ज्ञापन में समिति ने राज्य सरकार से स्पष्ट रूप से माँग की कि बापूग्राम को शीघ्र राजस्व ग्राम घोषित किया जाए, ताकि निवासियों को उनके वैध भूमि, आवास व सामाजिक अधिकार प्राप्त हो सकें और यह ऐतिहासिक बस्ती प्रशासनिक मान्यता के साथ अपनी पहचान बनाए रख सके। समिति ने इसे भूमि या अधिकार का साधारण विषय नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से जुड़े एक अधूरे संकल्प को पूर्ण करने का विषय बताया।
**आदर्श ग्राम के रूप में पुनर्स्थापना की अपील**
समिति ने मुख्यमंत्री से अपील की कि बापूग्राम को पुनः उसके मूल स्वरूप में स्थापित किया जाए, इसे एक राष्ट्रीय आदर्श ग्राम के रूप में विकसित किया जाए, और इसे महात्मा गांधी, सरदार पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा मीरा बहन की विरासत के रूप में पुनः प्रतिष्ठित किया जाए। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के नेतृत्व में बापूग्राम पुनः उस स्थान को प्राप्त कर सकता है जिसके लिए इसे मूल रूप से स्थापित किया गया था — एक आदर्श, एक प्रेरणा, भारत का एक ग्राम।
