सड़के बंद होने से पूर्वी बांगर क्षेत्र में विवाह कैसे होंगे संपंन, ग्रामीणों को सता रही चिंता….
छेनगाड़ में लापता आठ लोगों का अभी तक नहीं चल पाया कुछ पता….
रुद्रप्रयाग । विगत 28 अगस्त को जनपद के बसुकेदार क्षेत्र में आई आपदा के बाद अभी तक भी हालात नहीं बदले हैं। सड़क मार्ग बंद होने से सबसे बड़ी परेशानी का सामना पूर्वी बांगर के लोगों को करना पड़ रहा है। छेनागाड़ में आई आपदा में लापता आठ लोगों का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। परिजन अपनों की तलाश में हर रोज छेनागाड़ पहुंच रहे हैं, लेकिन बैरंग ही वापस लौट रहे हैं। परिजनों को हर दिन यह उम्मीद है कि उनका शव मिलेगा, लेकिन लगातार सर्च अभियान चलने के बाद भी कुछ पता लापता लोगों का अभी तक नहीं चल पाया है।
विगत 28 अगस्त को छेनागाड़ सहित बसुकेदार क्षेत्र के आस-पास के गांवां में भीषण आपदा आई थी। छेनागाड़ कस्बे का तो नक्शे से ही इस आपदा में नामोनिशान मिट गया था। छेनगाड़ में आई आपदा में आठ लोग लापता हो चुके थे, लेकिन अभी तक इन आठ लोगों का कुछ पता नहीं चल पाया है। हालांकि हर रोज यहां सर्च अभियान जारी है। छेनगाड़ में लगातार मलबा साफ किया जा रहा है। कई स्थानों पर तो खुदाई का कार्य भी पूर्ण हो गया है। लापता लोगों के परिजन हर रोज इसी आस में छेनागाड़ पहुंच रहे हैं कि उनके शव मिलेंगे, लेकिन उन्हे निराश ही लौटना पड़ रहा है।
इधर, पूर्वी बांगर के गांवों के लोग आपदा के बाद से अब तक लगातार परेशान है। पूर्वी बांगर के डांगी, खोड़, माथ्यागांव, घंघासू सहित अन्य गांवों का संपर्क जिला व ब्लॉक मुख्यालय से कटा हुआ है। ग्रामीण पैदल ही आवाजाही कर रहे हैं और कई किमी पैदल चलकर रोजमर्रा की सामग्री पहुंचा रहे हैं। वहीं प्रशासन की ओर से भी घोड़े-खच्चरों की मदद लेकर इन गांवों तक राहत सामग्री भेजी जा रही है। ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह खड़ी हो गई है कि शादी-विवाह का सीजन शुरू हो गया है और अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है। ऐसे में ग्रामीणों को यह चिंता सता रही है कि वह किस तरह से आगामी दिनों में बारात लेकर जाएंगे या फिर उनके क्षेत्र में बारात कैसे आएगी।
विकासखण्ड जखोली के ज्येष्ठ प्रमुख नवीन सेमवाल ने कहा कि आपदा को आये हुये एक माह का समय होने वाला है, लेकिन अभी तक स्थिति सामान्य नहीं हो पाई हैं। सड़के बंद हैं और ग्रामीण पैदल चल रहे हैं। आपदा में लापता लोगों का भी अभी तक कुछ सुराग नहीं लग पाया है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह बन गई है कि आगामी दिनों में सड़के बंद होने से विवाह कैंसे संपंन कराये जायं। अब ग्रामीणों के सामने यही एक रास्ता बचा है कि वह पैदल जंगलों के रास्ते बारातों की आवाजाही करवाएं। उन्होंने सरकार के साथ ही स्थानीय प्रशासन से शीघ्र ही आपदा पीड़ित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य कराने की मांग की है।
