एनएच-707ए पर खुलेआम डाला जा रहा अवैध मलबा, वन विभाग मौन

मसूरी। एनएच-707ए पर निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा खुलेआम सड़क किनारे और जंगलों के बीच नाले-खालों में डाला जा रहा है। दिनदहाड़े लोडरों के माध्यम से की जा रही इस अवैध डंपिंग से जहां सड़क लगातार संकरी होती जा रही है, वहीं आसपास के पेड़-पौधों और प्राकृतिक वनस्पति को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

स्थिति यह है कि अब निर्माण मलबा केवल नालों और खालों में ही नहीं, बल्कि सड़क के किनारे भी डाला जा रहा है। इससे मार्ग की चैड़ाई प्रभावित हो रही है और वाहनों की आवाजाही के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। यह मार्ग मसूरी और देहरादून के बीच आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण मलबे को निर्धारित डंपिंग स्थलों पर डालने के बजाय जंगलों और सड़क किनारे ठिकाने लगाया जा रहा है। इससे प्राकृतिक जलधाराएं प्रभावित होने के साथ ही वन संपदा को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है। विशेष रूप से यह क्षेत्र रिस्पना नदी के उद्गम क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण पर्यावरणीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। हैरानी की बात यह है कि दिन के उजाले में मलबा डालने का काम जारी है, लेकिन वन विभाग और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। वन विभाग की ओर से समय-समय पर गश्त किए जाने और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई का दावा किया जाता है, लेकिन मौके की स्थिति इन दावों की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि अवैध मलबा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, सड़क किनारे डाले गए मलबे को हटाया जाए और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।