दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की त्रिदिवसीय हरि कथा का भव्य समापन

हरिद्वार। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा शिवालिक नगर स्थित शिव मंदिर में आयोजित त्रिदिवसीय श्री हरि कथा का भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन की शुरुआत सुमधुर एवं भक्तिमय  भजनों के साथ हुई, जिसमें भारी संख्या में पधारे श्रद्धालुओं ने सत्संग और भजनों का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर उपस्थित विशाल संगत का मार्गदर्शन करते हुए साध्वी अरुणिमा भारती ने जीवन में गुरु की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि बिना श्पूर्ण गुरुश् के ईश्वर की प्राप्ति सर्वथा असंभव है। हमारे शास्त्रों में पूर्ण गुरु की स्पष्ट पहचान बताते हुए कहा गया है कि सच्चा गुरु वही है, जो शिष्य के घट (अंतर्मन) के भीतर ही ईश्वर का साक्षात दर्शन करा दे। वहीं, साध्वी जहान्वी भारती जी ने भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलाओं का सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं को मात्र कथा के रूप में प्रस्तुत न करके, उनके भीतर छिपी गूढ़ आध्यात्मिक गहराइयों और जीवनोपयोगी रहस्यों को संगत के समक्ष उजागर किया, जिससे वहां उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आध्यात्मिक जागरण के साथ-साथ कार्यक्रम में सामाजिक उत्थान का भी एक अनूठा उदाहरण देखने को मिला। कथा के अंत में, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के नशा उन्मूलन कार्यक्रम श्बोधश् के निमित्त उपस्थित संपूर्ण संगत ने एक स्वर में शपथ ली कि वे जीवन में कभी नशा नहीं करेंगे और अपने समाज को भी नशा मुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। कार्यक्रम का विधिवत समापन प्रभु की पावन आरती के साथ हुआ, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आयोजकों की ओर से जानकारी दी गई कि जो श्रद्धालु नियमित सत्संग व संस्थान के आध्यात्मिक एवं सामाजिक प्रकल्पों से जुड़ना चाहते हैं, वे दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की निकटतम शाखा भैरव मंदिर कॉलोनी, कनखल में संपर्क कर सकते हैं।