श्रमदान के जरिये मोटरमार्ग का निर्माण करने पहुंचे तरसाली में ग्रामीण……

विगत मार्च से बंद पड़ा है तरसाली मोटरमार्ग का निर्माण कार्य…..

रुद्रप्रयाग । केदारघाटी के ग्राम तरसाली में मोटरमार्ग के कार्य को पूर्ण करने को लेकर ग्रामीणों ने श्रमदान करना प्रारंभ कर दिया है। दरअसल, गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग से दो किमी की दूर तरसाली गांव के लिए वर्ष 2018 में राज्य वित्त से तीन किमी मोटरमार्ग की स्वीकृति मिली थी, जिसका कटिंग कार्य वर्ष 2021 में प्रारंभ किया गया था, लेकिन विगत मार्च से कार्य बंद है। ग्रामीणों ने बताया करीब दो किमी कटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं शेष आठ सौ मीटर के करीब ही कटिंग कार्य शेष है।  जनप्रतिनिधियों, उच्च अधिकारियों एवं लोनिवि के आला अधिकारियों के पास मोटरमार्ग कार्य को पूर्ण करने की मांग को लेकर कई बार जा चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी सिर्फ कोरे आश्वासन देकर बैरंग लौटा देते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पांच जनवरी से श्रमदान करने को लेकर जिला प्रशासन सहित लोनिवि को पत्र दिया गया था। उसी को लेकर ग्रामीण एकत्र हुये मोटरमार्ग पर श्रमदान कर रहे हैं। वहीं साढ़े बारह बजे के करीब विभाग की जेसीबी मशीन मौके पर पहुंची। जिसको लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा सिर्फ खानापूर्ति के लिए जेसीबी मशीन भेजी गई है, जबकि कटिंग कार्य के लिए बड़ी पाकलैंड मशीन की आवश्यकता है। दोपहर बाद मशीन ने तरसाली मोटरमार्ग पर मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ किया। इस दौरान ग्रामीण धर्मानंद सेमवाल, प्रियधर अन्थवाल ने बताया कि तरसाली गांव के लिए तीन किमी मोटर रोड स्वीकृत हुई, जिसमें दो किमी से अधिक कटिंग कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि आठ सौ मीटर के करीब ही कटिंग कार्य शेष है। इधर, लोनिवि ऊखीमठ एई नरेंद्र कुमार ने बताया कि सोमवार को तरसाली मोटरमार्ग पर कार्य प्रारंभ करने के लिए मशीन भेज दी गई है। उन्होंने बतया कि मंगलवार को एनएच, लोनिवि एवं जियोलजिस्ट की टीम का संयुक्त निरीक्षण किया जाएगा, उसके बाद ही मोटर रोड के कार्य को लेकर आगे कार्य किया जाएगा।
—————————————-
दुष्कर्म के दोषी को अदालत से सुनाई 20 साल के कठोर कारावास की सजा

-शादी का नाटक रच नाबालिग से किया था दुष्कर्म

देहरादून, आजखबर। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अर्चना सागर की अदालत ने नाबालिग लड़की को बहला फैसला कर भगा ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले में दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोषी को 20 हजार रुपए का अर्थदंड और राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपए का प्रतिकर देने का आदेश दिया गया है। जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल 2019 को पटेल नगर कोतवाली क्षेत्र निवासी महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी 17 वषÊय बेटी घर से सामान लेने निकली थी। लेकिन वापस घर नहीं लौटी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच की, जिसमें सामने आया कि कुछ समय पहले उनके मकान में किराए पर रहने वाला सनी उर्फ सोनू नाबालिग को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था।
जांच में साफ हुआ कि वह (आरोपी) किशोरी को पहले हरिद्वार और फिर मेरठ ले गया और वहां उसने एक मंदिर में शादी का नाटक किया। उसके बाद दोनों गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित एक हॉस्टल में करीब सवा महीने तक पति-पत्नी के रूप में रहे। हॉस्टल संचालक मोहित शर्मा ने अदालत में गवाही दी कि उसने किशोरी को अपनी पत्नी बता कर कमरा किराए पर लिया था।
विशेष लोक अभियोजक अल्पना थापा ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता अपने बयानों से आंशिक रूप से मुकर गई और बचाव पक्ष के दबाव में कहा कि वह अपनी मजÊ से उसके साथ गई थी। हालांकि, अदालत में स्कूल रिकॉर्ड टीसी और मेडिकल साक्ष्य के आधार पर यह माना की घटना के समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिग की सहमति का कोई कानूनी महत्व नहीं होता है। जिसके बाद आरोपी सनी उर्फ सोनू निवासी हस्तिनापुर, मेरठ को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 20 हजार रुपए का अर्थदंड और राज्य सरकार को पीड़िता को एक लाख रुपए का प्रतिकर देने का आदेश दियादजे गया है।